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क्या होम्योपैथी आपको डिप्रेशन से राहत दिलाने में मदद करता है






यह देखकर अच्छा लग रहा है कि दुनियाभर में लोग धीरे-धीरे डिप्रेशन और इसके खतरों के बारे में जागरुक हो रहे हैं। लेकिन अजीब बात है कि डिप्रेशन के इलाज के लिए अपनाये जा रहे पारंपरिक उपचार के तरीकों से डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति की मानसिकता पर होनेवाले विनाशकारी प्रभावों के बारे में बहुत कुछ नहीं कहा गया है। कुछ मामलों में, साइकोथेरेपी जैसे पारंपरिक उपचार के तरीके की सलाह दी जाती है और एंटीडिप्रेसेन्ट्स की मदद से व्यक्ति का इलाज कराया जाता है। लेकिन बहुत दिनों तक इन दवाइयों के प्रयोग से न केवल पीड़ित व्यक्ति के शरीर बल्कि उसके मन पर भी बहुत अधिक नुकसान हो सकता है। स्थिति तब और गम्भीर हो जाती है जब दवाइयां खाना बंद करने से वह विथड्रॉल संकेत मानी जानेवाली विभिन्न समस्याएं महसूस करने लगती हैं। एंटीडिपेंटेंट्स के साइड-इफेक्ट्स भयावह हो सकते हैं, जिनमें वजन कम होने से लेकर यौन समस्याएं तक शामिल हो सकती हैं। डिप्रेशन का इलाज करने के लिए इन दवाओं का उपयोग करने के लिए लगभग प्रतिज्ञात, प्रतिवादशाली चौंकानेवाले हो सकते हैं। ऐसे में पीड़ित व्यक्ति की देखभाल करनेवाले खुद को दुविधा में पाते हैं, कि स्थिति से जुड़ी बुराइयों और दवाओं के साइड इफेक्ट्स के बीच क्या चुनें। ऐसी स्थितियों में हमें डिप्रेशन के उपचार के लिए एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता पड़ेगी, जिसमें व्यक्ति की नाजुक मानसिकता को समझने और समस्या के संकेतों की बजाय मूल कारण का भी इलाज किया जाता है। होम्योपैथी ऐसा ही एक तरीका है।

○  होम्योपैथी के अनुसार डिप्रेशन के मुख्य कारण ये हैं-

• दुर्व्यवहार- अतीत में शारीरिक, सेक्सुअल या मानसिक तौर पर दुर्व्यवहार या अब्यूज़ बाद में जीवन में क्लिनिकल डिप्रेशन के ख़तरे को बढ़ा सकता है। इन कारणों से युवा या 5 साल तक के छोटे बच्चे तक डिप्रेशन का शिकार बन जाते हैं।

• दवाएं- कुछ एलोपैथिक दवाओं का व्यक्ति की मनोदशा पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। पिम्पल के इलाज के लिए खायी जानेवाली आइसोटेटिनोइन, एंटी-वायरल दवा इंटरफेरॉन-अल्फा, और कॉर्टिसोस्टिरॉइड्स, जैसी दवाइयां डिप्रेशन का ख़तरा बढ़ाती हैं। इन दवाओं के कारण प्राकृतिक रक्षा तंत्र का दमन होता है और इस तरह डिप्रेशन की सम्भावना बढ़ जाती है।

• संघर्ष- कुछ मामलों में डिप्रेशन के विकास की जैविक सम्भावनावाले किसी व्यक्ति में डिप्रेशन पारिवारिक विवादों या दोस्तों के साथ झगड़े की वजह से भी हो सकता है।

• मृत्यु- किसी की मृत्यु का शोक या किसी प्रियजन से बिछड़ने का दुख यूं तो प्राकृतिक स्थितियां हैं लेकिन इनकी वजह से डिप्रेशन की सम्भावना बढ़ जाती है।

• अनुवांशिक कारण- परिवार में अगर किसी को डिप्रेशन हो चुका है तो आपको भी डिप्रेशन होने की सम्भावना अधिक होती है।

•बड़ी घटनाएं- नयी नौकरी लगने या शादी जैसी अच्छी घटनाओं की वजह से भी कोई व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो सकता है। इसी तरह किसी नये देश, शहर या जगह पर रहने जाने, नौकरी छूटने, तलाक या रिटायरमेंट जैसी घटनाओं के कारण भी व्यक्ति डिप्रेशन में जा सकता है।

• व्यक्तिगत समस्याएं- लोगों से घुलने-मिलने में परेशानी, कोई मानसिक बीमारी या परिवार या समाज से निकाले जाने के कारण किसी व्यक्ति को गम्भीर डिप्रेशन हो सकता है। जिसके इलाज के लिए डॉक्टरी मदद की ज़रूरत पड़ सकती है।

• गम्भीर बीमारी- कई बार डिप्रेशन किसी गम्भीर बीमारी के साथ आता है या दवाइयों या दवाइयों के कारण भी हो सकता है।

• व्यसन- मादक पदार्थों के लगातार सेवन करने वाले लोगों में से लगभग 30 गम्भीर डिप्रेशन से पीड़ित भी होते हैं।

○  होम्योपैथी डिप्रेशन से कैसे राहत दिलाता है?

दरअसल होम्योपैथिक उपचार प्रक्रियाओं का केंद्र बिन्दु पीड़ित व्यक्ति होता है, न कि डिप्रेशन से जुड़ी समस्याएं या संकेतों का इलाज। यह पीड़ित को जीवनभर एंटीडिपेंटेंट्स खाने की मज़बूरी या ज़रूरत से मुक्ति दिलाने की दिशा में काम करती हैं। होमियोपैथी उपचार मूलभूत भावनात्मक कारणों से निपटने के लिए तैयार किए जाते हैं, जो अवसाद को बढ़ाने का काम करते हैं। यहां हम बता रहे हैं कुछ होमियोपैथी नुस्खे जो विशिष्ट भावनात्मक स्थितियों के कारण बननेवाले तनाव से राहत दिलाएंगे।

• दबा हुआ क्रोध– एकोनाइट, ऑरम मेटलिकम, बेलाडोना, कोफ़ा क्रूडा, न्यूक्स-वोमिका, ब्रायोनिया, कैमोमीला, सल्फर, वर्ट्रम एल्बम

• किसी प्रियजन या पालतू जानवर की मौत- ऑरम मेटलिकम, बेलाडोना, हाइसाइमस, इग्नाटिया, नेट्रम-मुर, कास्टिकम, एंटिमोनियम क्रूडम, फॉस्फोरिक एसिड

• खुशी (अत्यधिक सेरोटोनिन और एंडोर्फिन)- अफीम, चाइना, कोफ़ा, अकोनाइट, पल्सातिला

• बिज़नेस में नुकसान/धनहानि/मानहानि- अर्नीका, हंस-टॉक्स, वर्ट्रम एल्बम, सरसपीरिला, आर्सेनिकम एल्बम, कैलेकेरा कार्बोनिका, इग्नाटिया, न्यूक्स-वोमिका

ये नुस्खे उपयोग के लिए सुरक्षित हैं और एंटीडिपेंटेंट्स जैसे ख़तरनाक साइड इफेक्ट्स का ख़तरा भी इनसे नही है। बहुत दिनों तक इनका सेवन आपके लिए नुकसादायक या लत में तब्दील होनेवाला नहीं है। लेकिन महत्वपूर्ण है कि आप इसका सेवन किसी होमियोपैथ विशेषज्ञ की देखरेख में ही करें। क्योंकि वही बता सकते हैं कि आपकी समस्या की मूल जड़ और गम्भीरता के आधार पर कौन-सी दवा खानी चाहिए।

डॉ. श्रीपाद खेडेकर ने मशहूर टेनिस खिलाड़ी नोवा जोकोविक का अस्थमा का इलाज किया है। उन्होंने यूरोपियन प्रीमियर लीग में खेल रहे कई यूरोपियन फूटबॉल खिलाड़ियों की भी मदद की है। स्वयं यूरोप में अभ्यास करनेवाले डॉ.श्रीपाद खेडेकर रिसर्च में विश्वास करते हैं। उन्होंने कई केस दुनियाभर के कई महत्वपूर्ण हेल्थ जर्नल्स के लिए सैकड़ों स्टडीज़ भी की हैं। वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक जानेमाने चिकित्सक, शिक्षक और लेखक हैं। डॉ. खेडेकर ने होमियोपैथी पर 4 किताबें लिखी हैं। वह सरल और प्रभावी समग्र दृष्टिकोण का उपयोग करके गंभीर और जटिल रोगों को निपटाने में माहिर हैं। होम्योपैथिक उपचार के आनुवंशिक आधार को समझने के विषय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त शिक्षक होने के नाते, वह कठिन और निश्चयपूर्वक मुश्किल और असाध्य रोगों के सफल, और कम खर्च पर इलाज के लिए प्रयास करते हैं। उनका दृढ़ विश्वास है कि क्रोनिक बीमारियों का इलाज़ पीड़ित व्यक्ति की ज़िंदगी में होनेवाली तनावपूर्ण घटनाओं के बारे में जानकर किया जा सकता है। वह अपने मरीज़ों को सबसे अच्छी सलाह और अच्छे परिणाम देने की कोशिश करते हैं। डॉ. श्रीपाद खेडेकर से उनके दादर (मुंबई) और बेलग्रेड (सर्बिया) के क्लिनिक्स में मिला जा सकता है और वे शुश्रूषा हॉस्पिटल मुंबई से भी जुड़े हुए हैं।